शिरसा सुमनःसंगाध्दार्यन्ते मुद्रण ई-मेल
शिरसा सुमनःसंगाध्दार्यन्ते तंतवोऽपि हि ।
तेऽपि पादेन मृद्यन्ते पटेऽपि मलसंगताः ॥

फ़ूलके संग से धागाभी मस्तक पर धारण होता है, और वही धागा जाल के संग से पाँव तले कुचला जाता है ।

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