| मन्दाक्रान्ता |
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मन्दाक्रान्ता छन्द में प्रत्येक चरण में मगण, भगण, नगण, तगण, तगण और दो गुरु वर्णों पर यति होती है । यही बात इस लक्षण में कही गई है: ऽ ऽ ऽ ऽ ॥ । ॥ ऽ ऽ । ऽ ऽ । ऽ ऽ यद्वा तद्वा विषमपतितः साधु वा गर्हितं वा कालापेक्षी हृदयनिहितं बुद्धिमान् कर्म कुर्यात् । किं गाण्डीवस्फुरदुरुघनस्फालनक्रूरपाणिः नासील्लीलानटनविलखन् मेखली सव्यसाची॥
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