मन्दाक्रान्ता मुद्रण ई-मेल

मन्दाक्रान्ता छन्द में प्रत्येक चरण में मगण, भगण, नगण, तगण, तगण और दो गुरु वर्णों पर यति होती है । यही बात इस लक्षण में कही गई है:

मन्दाक्रान्ताऽभ्बुधिरसनगैर्मो भनौ तौ ग-युग्मम् ।

क्यों कि अम्बुधि (सागर) 4 हैं, रस 6 हैं, और नग (पर्वत) 7 हैं, अतः इस क्रम से यति होगी और मगण, भगण, नगण, तगण, तगण और दो गुरु वर्ण होंगे ।

उदाहरण:
ऽ ऽ ऽ ऽ   ॥  ।  ॥ ऽ  ऽ  ।  ऽ  ऽ । ऽ ऽ
यद्वा तद्वा विषमपतितः साधु वा गर्हितं वा
कालापेक्षी हृदयनिहितं बुद्धिमान् कर्म कुर्यात् ।
किं गाण्डीवस्फुरदुरुघनस्फालनक्रूरपाणिः
नासील्लीलानटनविलखन् मेखली सव्यसाची॥

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