| ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति |
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ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना ।
अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे ॥ २४ ॥ उस परमात्मा को कितने ही मनुष्य शुद्ध हुई बुद्धि से ध्यान के द्वारा हृदय में देखते है, अन्य ज्ञानयोग के द्वारा तो कुछ कर्मयोग के द्वारा उसे देखते है - प्राप्त करते है ।
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