मय्येव मन आधत्स्व मुद्रण ई-मेल
मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय ।
निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥ ८ ॥

(इस लिए तू) मुझमें मन लगा और मुझमें ही बुद्धिको युक्त रख; जिसके उपरांत तू मुझमें ही निवास करेगा यह निःसंशय है ।

Comments (0)
Only registered users can write comments!
 

[+]
  • Increase font size
  • Default font size
  • Decrease font size
 Type in